यूपी में ‘पंडित-पासी-पासवान’ फॉर्मूले पर काम कर रहे चिराग, अखिलेश का बिगाड़ सकते हैं ‘गेम’

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोटों को लेकर नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के पक्ष में बड़ी संख्या में गए दलित वोट अब लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के निशाने पर हैं। बिहार में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के बाद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी अब उत्तर प्रदेश में अपना आधार बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

चिराग पासवान की रणनीति को मोटे तौर पर ‘पंडित-पासी-पासवान’ फॉर्मूले के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी एक तरफ गैर-जाटव दलितों के बीच अपना आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर ब्राह्मण मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कवायद भी शुरू कर चुकी है।

पार्टी पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत कर रही है, जहां पासी और पासवान समुदाय की अच्छी संख्या है। पार्टी नेताओं का दावा है कि पूर्वांचल में दो लाख से अधिक कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार किया जा चुका है और बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने की कवायद जारी है।

दलित वोटों के लिए चिराग का नया दांव

2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। 2019 में 62 सीटें जीतने वाली बीजेपी 2024 में 33 सीटों पर सिमट गई। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने दलितों के बीच अपनी पैठ बढ़ाई और कांग्रेस के साथ गठबंधन के जरिए बीजेपी के खिलाफ मजबूत सामाजिक समीकरण तैयार किया।

एलजेपी (रामविलास) इसी बदले हुए राजनीतिक माहौल में अपने लिए जगह तलाश रही है। पार्टी का मानना है कि बहुजन समाज पार्टी के कमजोर होने से दलित वोट बैंक में एक बड़ा राजनीतिक स्पेस पैदा हुआ है, जिसे वह भर सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *