नई दिल्ली। भारतीय सेना ने औपनिवेशिक दौर की परंपराओं को समाप्त करने की दिशा में अपनी वर्दी और उससे जुड़े नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। हाल ही में जारी 174 पृष्ठों के ‘आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026’ मैनुअल में इन परिवर्तनों का उल्लेख किया गया है। अधिकारियों के अनुसार ऐसा विस्तृत मैनुअल आठ वर्ष बाद जारी किया गया है।
बंदी जैकेट को मिली औपचारिक मान्यता
नए नियमों के तहत पहली बार अधिकारियों को औपचारिक ड्रेस कोड के रूप में बंद-गले वाली ‘बंदी जैकेट’ पहनने की अनुमति दी गई है। इसे फुल स्लीव शर्ट और फॉर्मल ट्राउजर के साथ पहना जा सकेगा। मैनुअल के अनुसार बंदी जैकेट का रंग सादा और संयमित होना चाहिए तथा इसके साथ बंद फॉर्मल जूते पहनना अनिवार्य होगा।
नई विंटर ड्रेस भी हुई शामिल
सेना ने सभी रैंकों के लिए ‘3बी’ नामक नई सर्दियों की वर्दी शुरू की है। इसमें अंगोला शर्ट, बैटल जैकेट और बेरेट शामिल किए गए हैं।
पाउच बेल्ट हटाई गई, तलवार रखना वैकल्पिक
मैनुअल के तहत मेस ड्रेस नंबर 5 और नंबर 6 से सेरेमोनियल पाउच बेल्ट हटा दी गई है। हालांकि कुछ विशेष रेजिमेंट और कोर में निर्धारित अवसरों पर इसका उपयोग जारी रहेगा। इसके अलावा परेड के दौरान रिव्यूइंग अधिकारियों के लिए तलवार साथ रखना अब वैकल्पिक कर दिया गया है।
महिला अधिकारियों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश
महिला अधिकारियों को सादे रंग की साड़ी या दुपट्टे के साथ कुर्ता-सलवार और टखने तक की सीधी पैंट पहनने की अनुमति दी गई है। बिना आस्तीन वाले कुर्ते, पलाजो और सिगरेट पैंट जैसे कैज़ुअल परिधानों पर रोक लगाई गई है।
ग्रूमिंग और व्यक्तिगत साज-सज्जा के नियम
मैनुअल में टैटू, बॉडी पियर्सिंग, हेयरकट, मूंछ, कॉस्मेटिक्स और अन्य व्यक्तिगत साज-सज्जा से जुड़े नियम भी शामिल किए गए हैं। सैनिकों को यूनिफॉर्म में किसी भी प्रकार का ब्रेसलेट पहनने की अनुमति नहीं होगी, सिवाय धार्मिक अवसर पर बांधे गए पवित्र धागे के।
मूंछों की लंबाई 12 सेंटीमीटर से अधिक नहीं हो सकती। यूनिफॉर्म में डिओडोरेंट और परफ्यूम के उपयोग की अनुमति नहीं है, जबकि आफ्टर-शेव लोशन का उपयोग किया जा सकता है।
महिला कर्मियों के लिए कॉस्मेटिक्स संबंधी नियम
महिला कर्मियों के लिए लिपस्टिक, रंगीन नेल पॉलिश, बिंदी और नोज पिन पहनने पर रोक लगाई गई है। सिंदूर लगाने की अनुमति है, लेकिन यह बेरेट या पीक कैप पहनने के दौरान दिखाई नहीं देना चाहिए।
‘रॉयल’ जैसे शब्द भी हटाए गए
नए नियमों में औपनिवेशिक दौर से जुड़े कई शब्दों और परंपराओं को हटाया गया है। मैनुअल की प्रस्तावना में कहा गया है कि यह कदम सेना की वर्दी और परंपराओं को आधुनिक भारतीय सोच के अनुरूप ढालने की दिशा में उठाया गया है।
सेना में स्वदेशीकरण और भारतीय परंपराओं को बढ़ावा देने की यह प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों में तेज हुई है, जिसके तहत औपनिवेशिक विरासत की कई पुरानी प्रथाओं की समीक्षा की जा रही है।